बुधवार, सितंबर 13, 2006

चिट्ठाकार असम्मेलन में हिन्दी

पहले दिन के शुरुआती सत्र मे श्रीमती गीता पद्मनाभन, स्वतंत्र पत्रकार, ने भाषाई चिट्ठीकारी पर प्रश्न पूछा था। मैने उसका संक्षिप्त परिचय हिन्दी के सन्दर्भ में, अपनी तीन महीने मात्र के हिन्दी चिट्ठाकारी के अनुभव के आधार पर, दिया। कई सारे प्रश्न भी आए जैसे हिन्दी कैसे लिखते हैं, मेरे क्या अनुभव है,क्या ब्लागर जैसे टूल वगैरह मददगार है, हिन्दी में कितने चिट्ठे है, हिन्दी चिटठो को कैसे ढूढते है, आदि। चूंकि यह शुरुआती सत्र था और उत्सुकता ज्यादा थी, सुझाव आया की क्यों ना इसपर एक अलग सत्र ही लिया जाए। पर पहला दिन काफी सारे सत्रों से ठसा-ठस था, उस दिन इसका आयोजन नहीं हो सका। इसी दौरान मेरे द्वारा पंकज नरुला और देबाशीष भाई दोनो को, हिन्दी सत्र हो सकने की स्थिति मे फोन पर शामिल होने का आग्रह भी किया गया और दोनो पूरे उत्साह से तैयार भी हो गए।

दूसरे दिन दूसरे अर्ध में चर्चा की संभावना अधिक थी पर मुझे कहीं जाना था..............और मुझे वहाँ और कोई हिन्दी जिटठाकार नहीं मिला जिसे ये काम करने की टोपी पहनाई जा सके, सो यह हो ना सका। पर विश्वास कीजिए कई लोगों ने मेरे दो मिनट के सुबह के बखान पर ही मुझे हिन्दी चिट्ठाकार के तौर पर पहचान लिया ( जैसे चाय पर किसी ने पूछा - "हाय, यू राईट इन हिन्दी?" इत्यादि)(हालाँकि किसी सुन्दर कन्या के मुँह से ये वचन निकले, ऐसा भी हो ना सका! )

मगर छोटे में कहूँ तो कई लोगो ने मूझसे आ के अलग से पूछा और मैने उनकी जिज्ञासा को देखते हुए बताया भी। मुझे जौर्ज जकारायस (याहू भारत के प्रमुख) से कुछ मिनट मिले और मैने उन्हे हिन्दी टंकित करके भी दिखाया। उन्होंने मेरे लैपटौप पर स्वयं भी प्रयास करके देखा और कुछ सवाल भी पूछे।हमने उनसे याहू पर हिन्दी समर्थन बढ़ाने का आग्रह भी किया।ब्लागस्ट्रीट के बोथरा ने भी फान्ट और ब्राउसर समर्थन की बात छेड़ी।

छोटे में इतना ही ..... मै ये तो नहीं कहता की मैं हिन्दी चिट्ठाकारी का डंका बजा के आया हूँ , पर हाँ, कहीं ना कहीं बात जरुर रख दी।
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10 टिप्‍पणियां:

राजीव ने कहा…

राजेश जी, आपको बधाई और धन्यवाद। पहले तो इस बात की कि इस प्रकार के (अ)सम्मेलन में जिसमें हिन्दी चिठ्ठाकार अल्पतम गणना में थे, आपने अनायास ही हिन्दी चिठ्ठाकारी का सफल प्रतिनिधित्व किया और दूसरे यह जान कर भी हर्ष हुआ कि न केवल प्रतिनिधित्व अपितु आप के व्याख्यान, चर्चा आदि से इस विधा से जुड़े अन्य भाषाओं के दिग्गजों में हिन्दी के प्रति उत्सुकता भी जाग्रत हुयी। आशा है कि भविष्य में ऐसे सम्मेलनों में हिन्दी के प्रति सम्मान बढ़ेगा और अपेक्षित व्यावसायिक समर्थन भी प्राप्त होगा।

Debashish ने कहा…

आपने हिन्दी चिट्ठाकारी की बात रखी यह स्वयं बड़ी बात है, ऐसे आयोजनों में अफरातफरी के बीच हर किसी की सुनवाई होना तो वैसे भी मुश्किल होता। एक बात और, आपकी और अन्य रपटों से भी यह समझ नहीं आया की स्कॉबल का सत्र आखिरकार हो पाया या नहीं!

RAJESH KUMAR ने कहा…

देबाशीषः राबर्ट स्कोबल का सत्र जरा तकनीकी तकलीफों के बाद ही सही पर हुआ जरुर , यहाँ पढें
http://www.podtech.net/blog/1085

संजय बेंगाणी ने कहा…

आपके प्रयास बधाई के पात्र हैं, और इसे कोई छोटा-मोटा काम न समझे. आपने मौके का फायदा उठाते हुए चिंगारी दिखा दी हैं, धमाका आज नहीं तो कल जरूर होगा.

Raviratlami ने कहा…

यह बात सही है. लोगों को पता ही नहीं है कि हिन्दी में भी चिट्ठा लिख सकते हैं!

हिन्दी लिखने वालों को लोग आश्चर्य से देखते भी हैं!

आखिर कम्प्यूटर तंत्र में यह कॉम्प्लैक्स लैंगुएज भी जो कहलाता है!

उन्मुक्त ने कहा…

हिन्दी का डन्का बजाने के लिये धन्यवाद

आशीष ने कहा…

राजेश जी, आपको बधाई और धन्यवाद। मै भी चेन्नई मे हूं। मुझे इस सम्मेलन का पता थोडी देर से चला। जिस कारण मै शामील नही हो पाया इसका मुझे खेद है।

Raman Kaul ने कहा…

राजेश जी, हिन्दी की बात करने के लिए साधुवाद। अन्य भारतीय भाषाओं का प्रतिनिधित्व कैसा था? चूँकि सम्मेलन चेन्नई में था, और तमिल में हिन्दी के मुकाबले चिट्ठाकार भी अधिक हैं, शायद तमिल का प्रतिनिधित्व काफी अच्छा रहा होगा।

Sunil Deepak ने कहा…

शायद यह आप के बताने का ही प्रभाव पड़ा है कि ब्लागस्ट्रीट वालों ने "फुरसतिया" को फ्रेश ब्लाग में दिखाया है, "मेरा पन्ना" को १०० सबसे अधिक देखे जाने वाले चिट्ठों में गिना है और "जो न कह सके" को ब्लाग आफ द डे बनाया है?

RAJESH KUMAR ने कहा…

सुनील जी, आपको और अन्य साथी चिट्ठाकारों को बधाई हो। यह तो आपके द्वारा बताए गए चिट्ठों मे लोगो की रुचि का का नतीजा है।
Blogstreet के वीर चन्द बोथरा जी ने बातचीत में ये भी बताया था कि Blogstreet हिन्दी के लिए एक अलग श्रेणी बनाने का भी विचार कर रही है।

राजेश