बुधवार, अक्टूबर 11, 2006

कम्प्यूटर पर संदेश टंकित करें, नोकिया फोन से भेजें

भारतीय भाषाओं में एस एम एस भेजना एक दुष्कर कार्य प्रतीत होता है। पर कुछ सुविधाएँ हैं जिसका प्रयोग करके आप इसका भी मजा ले सकते हैं। यदि आप नोकिया का फोन प्रयोग करते हैं तो यह काफी हद तक संभव है।ज्यादातर फोन निर्माता फोन खरीदते समय एक सी डी देते हैं जिसमे आपके कम्प्यूटर के लिए एक साफ्टवेयर होता है। यह साफ्टवेयर आपके फोन पर संगीत, फोटो आदि भेजने के लिए प्रयुक्त किया जाता है। आमतौर पर, आप इस साफ्टवेयर की मदद से फोन और कम्प्यूटर पर आपके दोस्त-परिचितों के नम्बर भी सीधे स्थानांतरित कर सकेंगे। इसके लिए फोन और कम्प्यूटर एक तार के माध्यम से, अथवा ब्लू टूथ या इन्फ्रा रेड पोर्ट के द्वारा जोड़े जाते हैं। नोकिया भी एक ऐसा ही साफ्टवेयर सी डी पर देती है जिसे पी सी सूट कहते हैं। पर एक महत्वपूर्ण सुविधा के साथ- इस साफ्टवेयर के माध्यम से आप अपना एस एम एस संदेश पी सी पर ही टंकित कर सकते है।
साथ लगे चित्र को देखिए। मैने रमण भाई के युनिनागरी टंकन पटल पर अपने संदेश तैयार करके यहाँ चिपका दिया है। फिर यही से अपने दोस्त का नाम दिया, तो साफ्टवेयर ने उनका नम्बर मेरे फोन से स्वयं ही समझ लिया। फिर वहीं से प्रेषण का बटन दबा के संदेश को रवाना कर दिया। यह काफी आसान प्रक्रिया है।कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। नोकिया के ज्यादातर अच्छे फोन पी सी सूट समर्थित हैं। (मैं एक पिटा हुआ ६६१० प्रयोग करता हूँ)। पर अच्छा होगा यदि आप पी सी सूट का नया वर्जन नोकिया के अंतरस्थल (यहाँ) से लें। यह तकरीबन २५ एम बी का है। ये भी ध्यान रखें कि कभी-कभी अक्षर बिखर जाते है। यदि पाने वाले का फोन नोकिया नहीं है, तो सब कुछ कचरा हो जाता है। फिर भी, 'कुछ नहीं से बेहतर कुछ भी' वाली बात होती है। दूसरी बात, सदेंश शायद छोटे लगें, पर अंग्रेजी से ज्यादा बाइट्स लेते प्रतीत होते हैं। यह पी सी सूट बिना आज्ञा के ही इसे दो या अधिक टुकड़ो में बाँट देता है। यदि ऐसा हुआ, तो उतने एस एम एस के पैसे भी लगेंगे।कुल मिला कर मेरा अनुभव संतोषप्रद है, पर यह और अच्छा हो सकता है। खासकर जब कि पाने वाले के फोन के निर्माता (ब्राण्ड) की जानकारी का अभाव हो तो ऐसी अवस्था का क्या निवारण है। यदि आप के कुछ दुसरे अनुभव हैं, तो आप भी बाँटे।

मंगलवार, अक्टूबर 10, 2006

विज्ञापन की मुद्रा!

यदि माना जाए तो यह एक विज्ञापन की तसवीर है जो कि थ्री एम नाम कि विख्यात कम्पनी ने वैन्कुवर, कनाडा में लगाया है।कम्पनी ये दर्शाना चाहती है कि ये शीशा इतना मजबूत है कि इसे आसानी से तोड़ा नहीं जा सकता है। इसलिए इसके अन्दर असली रुपए रखें है, तोड़ सके तो तोड़। मान गए। आमतौर पर कोई कम्पनी अपने उत्पादों में अपने विश्वास को इतने आत्मविश्वास से नहीं दर्शा पाती।फिर भी, असली दाद तब दी जाए जब यह बिहार में भी दो दिनों तक सुरक्षित रह सके !

गुरुवार, अक्टूबर 05, 2006

हवाई जहाज की निर्माण प्रक्रिया का विडियो


पंछी समान उड़ते हुए जहाज किसे प्रभावित नहीं करते। बोईंग कम्पनी के एक अंतरस्थल पर एक ७३७ को बनते हुए दिखाया गया है। यदि आप मेरे समान उत्साहित हैं तो यहाँ जाएँ फिर वहाँ पर स्थित लिंक के द्वारा ७३७-९०० ई आर कि साईट पर जा कर और इस विडियो का आनन्द लें।तकरीबन दो मिनट की क्लिप है पर है वाकई मजेदार।

Photo Courtesy: www.aerospace-technology.com

बुधवार, अक्टूबर 04, 2006

डेंगु ने ७ रेस कोर्स रोड में सेंध मारी

प्रधानमंत्री की भारी भरकम सुरक्षा भी मामूली से मच्छरों के आगे हार गई। कुछ दिन पहले तक शायद सुरक्षाकर्मी अपने शागिर्दो को यह कहते थे कि ध्यान रहे, बिना इजाजत मक्खी भी अन्दर ना जाए। पर ये कमबख्त मच्छर है कि हर व्यवस्था को धता बताते हुए और बिना संगीनो से घबराते हुए प्रधानमंत्री श्री सिंह के एक नहीं दो नातियों (या पोतों?) को अपने डंको से अस्पताल की राह दिखा दिया। अब जब ७ रेस कोर्स रोड में सेंध मारी जा सकती है, तो चिकुनगुनियाँ या डेंगु नाम का ब्रंह्मासत्र लेकर घूम रहे मच्छरों से जनता जनार्दन भारी खौफ में है।

फिलहाल हम रोहन और माधव के शीघ्र स्वास्थलाभ की कामना करते है।

इज्जत का सवाल है - इन मच्छरों को नहीं छोड़ना गब्बऱ!

चलते चलते - खबर आई है कि प्रमुख विमान कम्पनियाँ दिल्ली से आने जाने वाले विमानों में बिज़नेस क्लास यात्रियों को व्यक्तिगत मच्छर निवारण यँत्र देने के विचार कर रहीँ हैं।

शुक्रवार, सितंबर 22, 2006

ज़ोहो : अच्छा लगा


मैने हाल में एक अच्छा साईट देखा जिसे ज़ोहो कहते है। मैने तुरंत उनका वर्ड प्रोसेसर देखा तो काफी प्रभावशाली लगा।अभी इसमे हिन्दी लिखने की सुविधा तो नहीं पर कुछ अन्य अच्छी सुविधाएँ हैं।



इनके पास आनलाईन स्प्रेडशीट है और ज़ोहो शो नाम का प्रेसेन्टेशन बनाने का भी अच्छा औजार है।