मंगलवार, जून 12, 2007

गूगलंदाजी-३: आईये गूगल साइटमैप्स का महत्व जानें

हम सब चाहते हैं कि हमारा चिट्ठा काफी प्रचलित हो। इसका एक तरीका है कि नारद जैसे फीड संग्रहक पर डालें जहाँ से नए आलेख के बारे मे जानकर पाठकगण आपके चिट्ठे पर आवें। दूसरा तरीका एक दूसरों के ब्लागरोल पर आने कि कोशिश की जाए जिसके बारे में हम पहले बात कर चुके हैं। पर ध्यान देने वाली बात ये भी है कि धीरे धीरे गूगल पर हिन्दी में भी खोज का प्रचलन बढ रहा है जो कि एक अच्छी बात है।ऐसी स्थिति में आप चाहेंगे की आपका चिट्ठा गूगल पर दिखे। आप ये भी जानने को उत्सुक रहेंगे कि गूगल ने आपकी साइट को कब पिरोया और किन खोजों में आपकी साइट किस पायदान पर दिखती है। आपके ब्लाग का इस औजार से रिश्ता साधने से गूगल देवता भी प्रफुल्लित होते हैं क्योंकि इसके माध्यम से उन्हें भी आपके नित नए पोस्टों के आने की सूचना मिलती रहती है। ये महत्वपूर्ण बात है।गूगल साइटमैप्स एक टूल है जो इसी के लिए बनाया गया है। आइए इसे देखा जाए।
उपर दाहिने के चित्र से आपको मेरे इस चिट्ठे पर आ रहे कुछ यातायात का आभास मिलेगा, साथ ही ये दिखेगा कि गूगल पर खोजों में किन शब्दों द्वारा लोग यहाँ आ रहे है। तो क्या करना होता है आपको? बड़ा सरल है।
सबसे पहले अपने ब्लाग का पता लिख डालिए, जैसा कि इस चित्र मे दर्शाया गया है।

फिर आपको ये स्थापित करना होता है कि आप ही इस ब्लाग के स्वामी है। यदि आप बलागर पर अपना चिट्ठा चलाते हैं तो फिर आपको टेम्प्लेट के हेड टैग में साइटमैप द्वारा दिया मेटा टैग डालना होता है। यदि आप होस्टेड वर्डप्रेस चला रहे हैं तो आप रूट में एक फाइल डालके भी अपने चिट्ठे पर अपना सवामित्व स्थापित कर सकते हैं।

अगला कदम काफी महत्वपूर्ण है इसलिए ध्यान दें - अब आपको अपने ब्लाग के साइटमैप की ओर इशारा करना होता है। अगर आप बलागर पर हैं तो लिखे http://aapkablog.blogspot.com/atom.xml. यही आप वर्डप्रेस पर हों तब लिखे http://aapkablog.wordpress.com/atom.xml.
बस अब आपका चिटठा सेट हो गया। इस साइटमैप को गूगलदेव निगरानी करते रहते हैं। यदि आप नया पोस्ट लिखते हैं तो यहाँ एक एंट्री हो जाती है जिसे गूगल बाबा को सूचना हो जाती है और मकड़े आपके चिट्ठे का भ्रमण करने निकल पड़ते हैं।
अब आगे आपको कुछ रिपोर्टें बराबर मिलती रहेंगी।
मसलन गूगल के मकड़ों ने कब आपके ब्लाग का विचरण किया।


और कि गूगलदेव आपके पेजों को कितना महत्वपूर्ण मानते हैं।


यहीं पर सारी बात खत्म नहीं होती आपको और भी जानकारियाँ मिलती रहती हैं जैसे आपके चिट्ठे को किन और साइटों और चिट्ठों से लिंक मिली हुई है आदि।
यदि आप अपने चिट्ठे को गंभीरता से लेते हैं तो मेरा आग्रह है कि जल्द से जल्द गूगल साइटमैप्स की स्थापना आपके चिट्ठे पर की जाए। और हाँ, ध्यान रहे कि पहली बार आपके चिट्ठे संबंधी रिपोर्टें दिखने में कुछ हफ्तों का समय भी लग सकता है, निराश बिलकुल ना होएँ। और हाँ, हमें आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा।
Test

8 टिप्‍पणियां:

अनूप शुक्ल ने कहा…

सही है। अब फ़ीडबैक भी दिया जायेगा!

रंजन ने कहा…

धन्यवाद!! हमने तो पुरा process कर डाला!

हरिराम ने कहा…

मेरे हिन्दी ब्लॉग की तो फीड ठीक जा रही है, किन्तु ओड़िआ भाषा के ब्लॉग को अभी तक गूगल बाबा शायद ठीक से समझ नहीं पा रहे हैं।

अतुल शर्मा ने कहा…

कोशिश तो हमने भी की है। तकनीक की बात है समझने में कुछ कठिन है। इसमें आगे site को verify करना क्या है? और यह वर्डप्रेस डॉट कॉम पर शायद संभव नहीं है क्योंकि इसमें कोई html फाइल अपलोड करने या मेटा टैग को टेम्पलेट में लगाने की बात कही गई है।
वैसे गूगल को साइट का पता तो दे दिया है।

Rajesh Kumar ने कहा…

मित्रों, पढने में ये आलेख जरूर भारी भरकम लग रहा हो, पर सच मानिए कि जब आप इसे अपने चिट्ठे पर लागु करने बैठेंगे तो ये काफी सरल लगेगा। अतुल जी, वर्डप्रेस पर इसे लागु करने की सीमाएँ है, आप वहीं तक जा सकते हैं, जहाँ तक आप गए हैं।

बेनामी ने कहा…

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बेनामी ने कहा…

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Rajesh Kumar ने कहा…

गुमनाम जीः हिन्दी में चिट्ठों कि अपनी दुनिया है। कभी समय निकाल के ऊपर दिख रहे नारद वाले लोगो पर क्लिक करें। वहीं बाजु मे 'हिन्दी कैसे लिखें' कि लिंक है। और हाँ, आपने पूछा है इतनी हिन्दी कैसे लिख ली जाती है। जवाब है, दिल से।