रविवार, अक्तूबर 23, 2011

काफी समय बाद...


काफी समय बाद लिख रहा हूँ। वर्ष के इस खंड के आते ही समूचे भारत में मौसम में थोड़ा परिवर्तन दिख रहा है, और हवा की नमी में भारीपन आ चुका है। शायद यह दीपावली के आने का संकेत है।
आप सभी को दीपावली के पर्व की शुभकामनाएँ। आपकी दीपावली आनन्दमई होवे और हर दीप आपके जीवन में एक नया हर्षमय राग छेड़े।




गुरुवार, फ़रवरी 11, 2010

गूगल चुनौती :क्या हिंदी ब्लागरों में है दम?!

गूगल देव हिंदी भाषियों के लिए लाये हैं एक प्रतियोगिता.
यदि आपको लगता हैं की आपमें हैं दम , तो निश्चय ही अपनी प्रविष्टि डालें.

शशिधर जी, जानकारी के लिए धन्यवाद

शुक्रवार, फ़रवरी 05, 2010

डेढ साल के बाद पुनः हाजिर

आज ये किसी मन के कोने से ये इच्छा हुई कि क्यों न कुछ पोस्ट कर दिया जाय। मेरा कहना ये है कि का लिखा जाए।

गुरुवार, जुलाई 10, 2008

क्या इस चिट्ठे को दुबारा जीवित कर दिया जाए?

सोचता हूँ चिट्ठे का जीवन कितना उत्तम है- कभी भी जीवित कर लिया जाता है। पर शायद ये बात पूरी सही भी नहीं। अगर सही भी है तो कम-से-कम उचित तो नहीं है। आक्सीजन की जरुरत तो हर कुछ को होती है। चलिए आज से इस चिट्ठे को आक्सीजन की पूर्ति की जाय। मुलाकात को इतने दिन हुए कि चर्चा कहाँ से शुरू की जाए? इतने दिनों मे तो हमने मैसूर घूम आए, सिगरेट पीना छोड़ दिया (इसपर भी चर्चा किसी दिन जल्द ही), केरल भी घूम लिया, अपने अंग्रेजी चिट्ठे को ब्लागस्पाट से वर्डप्रेस पर खिसका दिया, और पता नहीं कितनो से दोस्ती और कितनों से लड़ाई हुई़!
तो संक्षेप में ये वादा रहा कि लिखता रहूँगा। आज के लिए मैसूर के महाराज का महल की तसवीर, रविवारी रोशनीं में।



( तसवीर हमारे फोन से खींची गई )

रविवार, जनवरी 20, 2008

कुमारकोम की एक यादगार यात्रा।



कुमारकोम दरअसल बैकवाटर पर है, यानि समुद्र के पानी द्वारा बनी काफी बड़ी वेमबानाद झील पर बसा है। यहाँ से आप हाउसबोट पर सवारी कर सकते हैं, और हाउसबोट भी ऐसे कि आप देखते ही रह जाएँ। हमने यहा दो मंजिले हाउसबोट भी देखे, जो किसी सितारा होटल से कम नहीं लगते। यहाँ के हाउसबोट पर सारी सुविधाएँ होती हैं जैसे वातानुकूलित कमरा, कुक आपकी सेवा में शानदार खाना पेश करते हैं, और रात को जब हाउसबोट एक शान्त स्थल पर रुक जाती है, तो कुछ अदभुत ही आनन्द आता है।
मैं बोट की बैठक पर
वैसे यदि समय हो तो एक छोटी बोट पर कुमारकोम शहर के चारो ओर भी विचरण किया जा सकता है। कुछ वेनिस जैसा आभास भी होता है।





कुल मिला के कुमारकोम में काफी आनन्द आया, हमारा अगला पड़ाव था तेकड़ी, जिसकी चर्चा आने वाले पोस्ट में जारी रहेगी। चलते चलके कुमारकोम कि एक और तसवीर।